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विपर्यय
विपर्यय
योग
दर्शन
में
चित्त
की पांच
वृत्ति
यों में से एक है - गलत ज्ञान या
भ्रम
।
विपर्यय का अर्थ है किसी चीज़ को कुछ और के रूप में जानना (जैसे सीप को चाँदी के रूप में देखना)।
विपर्यय
अज्ञान
का एक रूप है।
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