पुनरावृत्ति


परिभाषा

  • पुनरावृत्ति (या दोहराव) माया का वह चक्रीय स्वभाव और प्रवृत्ति है जिसके अंतर्गत एक ही घटना, नादरचना या वृत्ति समय और स्थान के चक्र में बार-बार स्वतः को दोहराती है।
  • यह प्रपंच के संघटन और अनुभवों के सुव्यवस्थित होने की एक आवश्यक प्रक्रिया है।

मुख्य शिक्षाएं

  • दृश्य जगत में पाई जाने वाली जटिलता इसी पुनरावृत्ति का परिणाम है; एक छोटी इकाई (जैसे पत्ता या कोशिका) बार-बार दोहराकर संपूर्ण वृक्ष या शरीर जैसी विशाल संरचना बनाती है।
  • स्मरण भी स्मृति में संचित नादरचना की एक प्रकार की पुनरावृत्ति ही है, जिसे इंद्रियां बार-बार अनुभव करती हैं और बुद्धि जिसे अतीत का नाम देती है।
  • पुनरावृत्ति चित्त की वृत्तियों को मजबूत करती है, जिससे आदतें, प्रवृत्तियां और संस्कार स्मृति पटल पर और अधिक घनीभूत हो जाते हैं।
  • यह चक्रीय दोहराव मूलतः नाद के चक्रीय होने का सीधा परिणाम है, क्योंकि नाद सदैव दो विपरीत अवस्थाओं के बीच घूमता रहता है।

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