परिभाषा
- आध्यात्मिक वृत्ति चित्त की वह उच्चतर वृत्ति या अवस्था है जिसके जागृत होने पर साधक जीवन, जगत, स्वयं और अस्तित्व के संबंध में गंभीर एवं मूलभूत प्रश्न पूछने लगता है।
- यह वृत्ति बुद्धि की वह परिष्कृत अवस्था है जो जीव को सांसारिक प्रपंचों से ऊपर उठाकर सत्य की ओर उन्मुख करती है।
मुख्य शिक्षाएं
- आध्यात्मिक वृत्ति बुद्धिमान चित्त के विकास से उत्पन्न होती है, जहाँ साधक केवल उत्तरजीविता और पशुवृत्ति तक सीमित न रहकर अस्तित्व के गूढ़ रहस्यों को जानने का प्रयास करता है।
- इस वृत्ति के जाग्रत होने पर चित्त की निचली परतें (जैसे काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या) मंद पड़ने लगती हैं और भावनाएं विवेक के नियंत्रण में आ जाती हैं।
- आध्यात्मिक वृत्ति साधक को ध्यान और मनन की ओर ले जाती है, जिससे बुद्धि अंतर्मुखी होकर स्वयं के मूल तत्व पर केंद्रित होती है।