परिभाषा
- विलय (या विलीन होना) द्वैत के काल्पनिक भेदों का पूरी तरह मिटकर एक हो जाने की परम अवस्था है।
- ज्ञानमार्ग पर अनुभव और अनुभवकर्ता का पूर्ण विलय ही वास्तविक अनुभवक्रिया (अद्वैत) कहलाता है।
मुख्य शिक्षाएं
- अस्तित्व में द्वैत का सारा खेल केवल चित्त की विभाजनकारी वृत्ति के कारण ही प्रतीत होता है; जब इस वृत्ति का अंत होता है, तब अखंड अस्तित्व में विलय घटित होता है।
- चित्त की परतों का ऊपर की ओर उठना (आरोहण) अंततः व्यक्तिगत सीमाओं को समाप्त करके ब्रह्म या विश्वचित्त में संपूर्ण विलय की ओर ले जाता है।
- विलय कोई अस्थायी मानसिक अवस्था या बलपूर्वक की गई क्रिया नहीं है; यह तो केवल अज्ञान के नाश से होने वाला स्वतः प्रकटीकरण है कि 'सब कुछ पहले से ही एक है'।
- विलय की अंतिम स्थिति में 'मैं' और 'मेरा' का अहंकार पूरी तरह विलीन होकर पूर्ण अद्वैत प्रेम और अखंड शांति का स्वरूप बन जाता है।