विलीन चित्त


परिभाषा

  • विलीन चित्त चित्त की वह सबसे सूक्ष्म, सर्वोच्च और असीमित परत है जहाँ सभी महाक्षेत्र, व्यक्तिगत स्मृतियां, और संभावित नाद तरंगें बिना किसी विभाजन के अखंड रूप से एक हो जाते हैं।

मुख्य शिक्षाएं

  • विलीन चित्त की परत में सभी लोक, जीव और सृजन की अनंत संभावनाएं अखंड रूप में विद्यमान होती हैं, जहाँ कोई पृथक भेद या सीमा नहीं की जा सकती।
  • इस परत में व्यक्तिनिष्ठता या व्यक्तिगत अहंकार का पूर्ण लोप हो जाता है; यह चित्त की वह अवस्था है जो अनुभवकर्ता के परम आकाश के सर्वथा निकट है।
  • यहाँ समस्त वृत्तियाँ संभावित नाद में विलीन हो जाती हैं; यह अज्ञेयता और पूर्ण शून्यता की स्थिति है जिसमें भेद करना असंभव है।
  • साधक का ध्यान जब इस परत तक विस्तारित होता है, तो वह संपूर्ण ब्रह्मांड को अपनी ही महिमा या लीला के रूप में प्रत्यक्ष अनुभव करता है।

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