परिभाषा
- स्वेच्छा (या स्वतंत्र इच्छा) अपनी मर्जी से किसी विकल्प को चुनने और कार्य करने का वह मानसिक भाव है जो वास्तव में चित्त की स्वचालित प्रक्रियाओं के कारण उत्पन्न होता है।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, स्वतंत्र इच्छा जैसी कोई पूर्ण स्वतंत्र सत्ता नहीं है; यह केवल अहंकार द्वारा आरोपित कर्तापन का एक भ्रम है।
मुख्य शिक्षाएं
- स्वतंत्र इच्छा का भ्रम केवल अज्ञान के कारण होता है; हमारे सभी चयन और इच्छाएं वास्तव में स्मृति में संचित पुराने संस्कारों, आदतों और आनुवंशिक कार्यक्रमों के तहत स्वतः ही घटित होते हैं।
- जीव के पास केवल कल्पित विकल्पों में से किसी एक को चुनने की सीमित स्वतंत्रता होती है, जो उसके पूर्व ज्ञान और अनुभवों से ही निर्धारित होती है।
- आत्मज्ञान होने पर जब कर्तापन का यह भ्रामक अहंकार नष्ट हो जाता है, तब जीव यह प्रत्यक्ष देख लेता है कि 'मैं कुछ नहीं करता, सब स्वतः हो रहा है, मैं केवल साक्षी हूँ'।
- साक्षी भाव में स्थित होना ही सभी भ्रामक इच्छाओं से परे वास्तविक स्वतंत्रता है।