अहंवृत्ति


अहंवृत्ति चित्त की वह वृत्ति है जो 'मैं' या अहम् का भ्रम पैदा करती है।

यह मनोशरीर से तादात्म्य कराती है और उत्तरजीविता के लिए आवश्यक है।

आत्मज्ञान में इस वृत्ति का क्षय होता है - तब 'मैं' केवल साक्षी के रूप में रह जाता है।

देखें : अहम्

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