द्वेष (संस्कृत: द्वेष) किसी वस्तु या अनुभव से घृणा या अरुचि है। द्वेष
राग के विपरीत है। ये दोनों
भावनाओं के मूल हैं।
ज्ञानमार्ग पर, राग और द्वेष से मुक्त होना
साधक के विकास का एक चरण है।
मुख्य शिक्षाएं
- द्वेष चित्त की वह वृत्ति है जो अप्रिय अनुभवों से दूर भागती है।
- राग (आकर्षण) और द्वेष (प्रतिकर्षण) — ये दो मन की मूल गतियां हैं।
- द्वेष अज्ञान का परिणाम है — जब विवेक नहीं, तो द्वेष उत्पन्न होता है।
- ज्ञानी राग-द्वेष से मुक्त होता है — वह सबको समान दृष्टि से देखता है।
- द्वेष बंधन का कारण है — मुक्ति के लिए द्वेष का त्याग आवश्यक है।
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